65 वर्ष के रिटायर लवगुरु की इच्छाओं के आगे आप भी दबा लेंगे दातों तले अंगुलियां

पटना। लवगुरू के नाम से फेमस पटना विश्वविद्यालय के बीएन कॉलेज में हिंदी विभाग के प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी आज रिटायर हो रहे हैं। अपने रिटायरमेंट से पहले आज उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट लिखा है जिसमें उन्होंने लिखा है। कि- मैं 65 वर्ष का लरिका हूँ ! मेरी जवानी ने अभी अंगड़ाई ली है ! मेरे अंग-अंग से यौवन की उमंग छलक रही है ! जब मैं मस्त होकर तेज चलता हूं तो लोग नजर लगाते हैं। ! दौड़ता हूं तो दांतों तले उंगली दबाते हैं मेरी खुशनसीबी कि इस चढ़ती जवानी में रिटायर हो रहा हूं ! लोग पूछते हैं कि रिटायरमेंट के बाद क्या कीजिएगा ? बरतुहार बहुत तंग कर रहे हैं ! उनकी आवाजाही बढ़ गई है ! लेकिन मैं एक अनुशासित, शर्मीला और परंपरा प्रेमी लरिका हूं ! इसलिए खुद बरतुहार से बात नहीं करता हूं उन्हें गार्जियन के पास भेज देता हूँ ! मेरे विद्यार्थी ही मेरे गार्जियन हैं। ! वे जो तय कर देंगे, आंख मूंदकर मानूंगा ! उनसे बड़ा हितैषी मेरा कोई नहीं हो सकता ! हंसी-मजाक छोडिए । बताइये कि रिटायरमेंट के बाद क्या योजना है ? क्योंकि आप जो योजना बनाते हैं, उसे परा करके ही दम मारते हैं ! अब हम केवल मस्ती करेगा...विदा हुआ वह मटकनाथ जो योजना बनाता था और उसे परा करने में लह सखाता था ।अब हम केवल मस्ती करेगा ! सबसे पहले हम ब्याह करेगा ! इसलिए आपलोगों का दायित्व है कि बिहार से आज पटियाला एक सुटेबल कन्या से मेरा ब्याह कराइये, फिर मेरी चाल देखिए ! विवाह के पहले कुछ नहीं करने का ! कुछ नहीं सोचने का !आज मेरा रिटायरमेंट डे है। वास्तव में यह मेरा स्वाधीनता दिवस है ! व्यर्थ के कार्यो से मुक्ति मिलने का आनंद मेरी रगों में दौड़ रहा है ! विश्वविद्यालय के क्लास बकवास हैं ! विद्यार्थियों की प्रतिभा कुंद करने के सिवा वहाँ कोई रचनात्मक काम संभव नहीं ! खुशी इस बात की है कि इस हिंसात्मक शिक्षा पटियाला जेल भेजा में जुटे रहने की बाध्यता से मुक्ति मिल रही है ! अब मैं जिस दिशा में कदम रखूगा, वह वास्तविक शिक्षा होगी ! किंतु, मैं कोई योजना बनाकर उसे पूरा करने के तनाव में नहीं पड़ेंगा । मन की तरंग पर सवार होकर उडूंगा ! अस्तित्व जो करवाना चाहेगा, उसी की इच्छा में अपनी इच्छा को लय करूंगा ! आत्म-सुख मेरी प्राथमिकता होगी । मेरी समझ है कि केवल सुखी व्यक्ति दूसरों को सुख पहुंचाने में सहायक हो सकता है । भेजा जाएगा ब्रजेश ठाकुटसमाज, देश और दुनिया को बदलने का नारा विशुद्ध धोखा है। एक दशक पहले लवगुरू नका प्यार बताते हो सके बनकर चर्चा में आए थे। पटना विश्वविद्यालय के बीएन कॉलेज में हिंदी विभाग के 51 साल के प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी ने अपनी 21 साल की शिष्या जूली को अपने जीवन का प्यार बताते हुए उसके साथ ही जीवन बिताने का फैसला किया था, जिसके बाद उनकी पत्नी ने सरेआम दोनों की जमकर बेइज्जती की थी और ये खबर अखबारों और मीडिया चैनल्स की सुर्खियां बनीं थीं। जूली के लिए मटुकनाथ ने समाज की परवाह किए बिना अपनी पत्नी को भी छोड़ दिया था। यूनिवर्सिटी ने पहले उन्हें निलंबित किया और बाद में कॉलेज से निकाल दिया। उनकी पत्नी ने टीवी पत्रकारों के साथ उस घर पर छापा पड़वाया जहां वह अपनी स्टूडेंट के साथ लिव इन में रह रहे थे। उनकी पत्नी ने मटुकनाथ को गिरफ्तार भी करवाया और आरोप लगाया कि वह स्टूडेंट्स को ज्यादा नंबर देने का वादा करके प्रलोभन देते थे। इसके बाद मटकनाथ ने तलाक और यूनिवर्सिटी से निलंबन की बहाली के लिए कोर्ट के चक्कर भी लगाए। मटुकनाथ और जूली के बीच की प्रेम कहानी से परेशान मटकनाथ की पत्नी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अलग रहने की अपील कोर्ट में दे दी। हाईकोर्ट से होते हुआ मामला सर्वोच्च न्यायालय तक गया और कोर्ट ने आखिरकार मटुकनाथ के खिलाफ फैसला सुनाया।