गालियों और तालियों ने लिफाफा कर दिया भारी, कविता हो गई बेचारी : राज्यमंत्रीअतुल गर्ग

गाजियाबाद। उत्तरप्रदेश के राज्य मंत्री अतुल गर्ग ने कहा कि अधिकांश साहित्यिक मंचों पर मर्यादा और शालीनता का चीरहरण तकलीफदेह है। उन्होंने हास्य के नाम पर मंचों पर बढ़ती फूहड़ता पर चुटीले बाण भी चलाए। श्री गर्ग अमर भारती साहित्य संस्कृति संस्थान के पांचवें वार्षिकोत्सव और सम्मान समारोह के मौके पर आईटीएस मोहननगर प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह का शुभारंभ करते हुए अपना विचार व्यक्त कर रहे थे। राज्यमंत्री श्री गर्ग ने में आगे कहा कि अधिकांश साहित्यिक मंचों पर सत्तासीन लोगों के तिरस्कार की एक नई प्रवत्ति जन्म ले रही है। कवि सम्मेलन में उन सरीखे लोगों को अतिथि बनाकर बुला तो लिया से लिया जाता है, लेकिन वहां जिस फूहड़ और अभद्र भाषा में राजनेताओं को निशाना बनाया जाता है, वह न तो साहित्य के दायरे में आता है और न ही बर्दाश्त के काबिल है। उन्होंने कहा कि वह  आयोजनों में पहले भी आते रहे हैं  कार्यक्रम में आकर आंखों में आंसू नहीं आते, झोली खुशियों से भर जाती  है।  गालियों के इस दौर में ऐसे कार्यक्रम साहित्य और भाईचारे को पल्लवित करने की एक जरूरी कोशिश हैं। श्री गर्ग ने ऐसे सरस्वती पुत्रों को सिरे से खारिज किया जो भारी- भरकम लिफाफे और तालियों की वजह से साहित्य की गरिमा को तार तार कर रहे हैं। श्री उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि वह अमृता प्रीतम, हरिवंश राय बच्चन और निराला को पढ़ कर बड़े हुए हैं। वह दौर था जब इलाहाबाद, बनारस, लखनऊ, कोलकाता साहित्य के गढ़ माने जाते थे। गाजियाबाद भी थे। गाजियाबाद भी अब न सिर्फ इस जमात में शामिल हो गया है बल्कि साहित्य के पटल पर रहा है।  कार्यक्रम में गीतकार डॉ. माहेश्वर तिवारी, रचनाकार महेश दर्पण, व्यंग्यकार आलोक पराणिक गीतकार आशा शैली, ग़ज़लकार रिफअत शाहीन एवं युवा प्रतिभा समृद्धि अरोड़ा को सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में डॉ. तिवारी ने कहा कि हम  विद्यापति, कबीर और निराला नहीं हो सकते लेकिन हम उनकी विरासत को आगे बढ़ा सकते हैं। आलोक पुराणिक ने कहा कि व्यंग्य विसंगतियों से ही जन्म लेता है। मौजूदा दौर व्यंग्य के लिए उपयुक्त समय है। औद्योगिक विकास निगम  की क्षेत्रीय प्रबंधक सश्री स्मिता सिंह ने कहा कि साहित्य के क्षेत्र में गाजियाबाद ने इलाहाबाद को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि वह गाजियाबाद में ही इलाहाबाद को अवतरित होते हुए देख रही हैं। कार्यक्रम का संचालन तरुणा मिश्रा और सुरेंद्र शर्मा ने किया। संस्थान के अध्यक्ष एवं संरक्षक मंडल से जुड़े डॉ धनंजय सिंह, आनंद सुमन सिंह एवं गोविंद गुलशन ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रख्यात कवि एवं चित्रकार हरिपाल त्यागी, डॉ. सीता सागर, सरवर हसन सरवर, सुभाष चंद्र, अपर्णा पुराणिक, डॉ. वीना मित्तल,बबली वशिष्ठ, अमरेंद्र राय, आई टी एस के निटे सुभाष अखिल, आलोक यात्री, शेखर, सरेंद्र अरोड़ा, डॉ. रमा सिंह, राकेश रेणु, रवि पाराशर, कल्पना ग नौ कौशिक, एम. के. चतुर्वेदी मयंक,आर.के. भदौरिया, इंद्रजीत सुकुमार, कीर्ति रत्न, डॉ. राजीव पांडेय, स्नेह लता गुप्ता, डॉ. पूनम सिंह, आर.पी. बंसल, प्रीति परेशां, इंदु शर्मा, डॉ ईश्वर सिंह तेवतिया, प्रदीप पु सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी देशक आईटी डॉ सुनील पाई उपस्थित थे।.