जीडीए में केंद्रीय कृत व्यवस्था होने से भ्रष्टाचार-लेटलतीफी पर लगेगी लगाम

गाजियाबाद। जीडीए में भ्रष्टाचार व लेटलतीफी पर काबू पाने और अपने-अपने जरूरी कार्यों से यहां भटकने वाले आमलोगों को सहूलियतें प्रदान करने के लिए जीडीए उपाध्यक्ष कंचन वर्मा अब और अधिक सक्रिय नजर आ रही हैं। यही वजह है कि सिटीजन चार्टर का अनुपालन कैसे और कितनी त्वरित गति से हो, इसकी पूर्व निर्धारित रूपरेखा को नए सिरे से अमलीजामा पहनाने के कार्य को उन्होंने अंतिम रूप दे दिया है। यदि सबकुछ ठीक- ठाक रहा तो आगामी दिसम्बर माह से यहां की कार्यदशा में अभूतपूर्व बदलाव दखने को मिलेगा। क्योंकि तब तक यहां सिंगल विंडो सिस्टम लागू कर दिया जाएगा। इससे सिटीजन चार्टर को पूर्ण रूप से लागू करने में काफी मदद मिलेगी। बता दें कि कहने को तो जीडीए में सिटीजन चार्टर वर्ष 2012 से ही लागू है। जिसका अनुपालन शुरुआती दिनों में किया भी गया, लेकिन बाद में यह आहिस्ता-आहिस्ता ठंडे बस्ते में चल गया। जानकार बताते हैं कि जीडीए में अभी केंद्रीयकृत व्यवस्था नहीं होने के कारण जरूरतमंद व्यक्ति को अपने आवश्यक कार्य के लिए भी पटल दर पटल भागना पड़ता है। फिर भी फाइल किस पटल पर लम्बित है, इस बात का पता भी उन्हें कभी कभी नहीं । चल पाता है। यही कारण है कि कई बार लोगों ने इस प्रकार की अव्यवस्था की शिकायत जीडीए उपाध्यक्ष या अन्य सक्षम अधिकारियों से भी की है। लिहाजा, इस समस्या का समाधान करने के लिए ही जीडीए में शीघ्र ही केंद्रीयकृत डेस्क बनाई जाएगी और सिंगल विंडो सिस्टम के मार्फत सिटीजन चार्टर को पूर्ण रूप से लागू करवाया जाएगा ताकि आमलोगों को सहूलियत हो। इस बाबत जीडीए उपाध्यक्ष कंचन वर्मा ने कहा कि दिसम्बर माह से सिंगल विंडो सिस्टम लागू होगा, जिसके लिए जातो इस हीलर में एक विशेष डेस्क बनाई जाएगी। उसी डेस्क पर लोग अपने-अपने कार्यों के लिए फाइल जमा करेंगे। उसके बाद हर पटल पर समय के मुताबिक कार्य निष्पादित करते हुए फ़ाइल को आगे बढ़ाया जाएगा। उसी विशेष डेस्क से लोगों को यह भी पता चलेगा कि उनकी फाइल कहां पर अटकी हुई है। इस प्रकार दिसम्बर माह से सिटीजन चार्टर के मुताबिक नए सिरे से काम होगा और लोगों को पूरी सहूलियत मिलेगी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पहले इसे मैनुअल तरीके से लागू किया जाएगा। उसके बाद इस निमित्त जीडीए एक अलग सॉफ्टवेयर तैयार करवाएगा जिसे सफल अनुप्रयोग के लिए ऑनलाइन भी कर दिया जाएगा। बता दें कि विभिन्न योजनाओं में भूखण्डों और भवनों की उपलब्धता ज्ञात करने, प्राधिकरण द्वारा संचालित नई योजनाओं की जानकारी मुहैय्या करवाने और 300 वर्ग मीटर तक के मानचित्र की स्वीकृति के लिए एक दिन का समय नियत है। जबकि, भूखण्ड भवनों के आवंटन की प्रगति रिपोर्ट देने के लिए तीन दिन, किश्तों की गणना सम्बन्धित विवरण के लिए सात दिन और जमा धनराशि की विसंगति के समाधान के लिए दस दिन का समय निर्धारित है। भूखंड की गणना सरिजम धनराशि की राजनीति और भवनों की कॉस्टिंग करने, ड्रा के बाद मूल आवंटन पत्र जारी करने, पट्टे की भूमि को फ्रीहोल्ड करने और अनुबन्ध, विक्रय विलेख का निष्पादन करने के लिए पन्द्रह दिन का समय तय है।इसके अलावा, तीन सौ वर्ग मीटर से बड़े भूखण्ड की मानचित्र स्वीकृति के लिए तीस दिन, भूखंड और भवन के म्यूटेशन और भूखण्ड तथा भवन का नामांतरण या प्रत्यावर्तन के लिए साठ दिन का समय सुनिश्चित है। जानकारों के मुताबिक, प्रतिदिन तकरीबन एक हजार लोग अपने-अपने व्यक्तिगत कार्यों को लेकर जीडीए आते हैं और विभाग की समुचित जानकारी नहीं होने के चलते इधर उधर घूमते फिरते हैं, जबकि ऐसे लोगों की फाइलों पर बाबू लोग कई महीनों तक कुंडली मारे बैठे रहते हैं। इससे संस्थान और सरकार दोनों की बदनामी होती है। यही वजह है कि उपर्युक्त व्यवस्था शीघ्र ही लागू कर दी जाएगी। जीडीए के अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था के लागू होते ही डेस्क पर फ़ाइल जमा करवाने के वक्त ही समर्पित किये जाने वाले दस्तावेजों को जांच पड़ताल की जाएगी और उसमें यदि कोई कमी रहेगी तो फाइल लौटा दी जाएगी।