कश्यप निषाद मेहरा आदिवासी महासभा ने सीएम के नाम डीएम को सौंपा ज्ञापन

 गाजियाबाद। कश्यप निषाद मेहरा आदिवासी महासभा ने शुक्रवार को सूबे की अनुसूचित जाति गोंड, मझवार, तुरैहा की पर्यायवाची जातियों कश्यप, निषाद, कहार, बिंद, केवट, मल्लाह, धीवर, धीमर, तुराहा, रायकवार, बाथम को भी अनुसूचित जाति की श्रेणी में परिभाषित करने के लिए मुख्यमंत्री को सम्बोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी रितु माहेश्वरी द्वारा दिया। महासभा का मानना है कि उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक जनसंख्या वाला प्रदेश है जहां पर कई पर्यायवाची जातियां जो सामाजिक, शैक्षिक तथा आर्थिक क्षेत्र में समान रूप से पिछड़ी हुई हैं, और जिनके मध्य परस्पर रोटीबेटी का संबंध सैकड़ों वर्षों से स्थापित होता चला आ रहा है जो एक ही संस्कार एवं सामाजिक मान्यताओं के साथ जुड़े हैं, जिनमें उपर्युक्त पर्यायवाची जातियां सम्मिलित हैं, क्योंकि इस समुदाय के साथ आजादी के पूर्व से ही भेदभाव व छुआछूत का व्यवहार किया जाता रहा है। लिहाजा, इस समुदाय के तीन पर्यायवाची नाम से जानी जाने वाली जाति गोंड अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति की सूची में क्रमांक 36 पर, मझवार अनुसूचित जाति के क्रमांक 53 पर तथा तुरैहा अनुसूचित जाति के क्रमांक 66 पर अंकित है। लेकिन हैरत की बात है कि इन तीनों जातियों की उपर्युक्त लिखी पर्यायवाची जातियां पिछड़ी जाति की सूची में अंकित है। जो कि न्यायसंगत नहीं है। कहना न होगा कि इस समुदाय की सभी पर्यायवाची जातियों की वंश, कुल, परम्परा, संस्कृति तथा मान्यताएं एक ही हैं, लेकिन अनुसूचित जाति- अनुसूचित जनजाति की सूची बनाते समय इस समुदाय को उस समय के शासकों ने खंड-खंड कर दिया। । डालो और शासन करो की नीति ने डालो और शासन काग्रेस की फूट इस कश्यप, निषाद समुदाय को कभी संगठित ही नहीं होने दिया जिसके कारण यह समदाय उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा गरीब एवं उपेक्षित है। महासभा का मानना है कि देश व उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के शासन में आने के उपरांत जिस प्रकार एससी-एसटी उत्पीड़न अधिनियम को केंद्र सरकार ने और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को पलटते हुए अध्यादेश लाकर दलितों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान की है, और ओबीसी वर्ग के राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाकर पिछड़ों के दिखाई है, उसके मद्देनजर एक बार प्रति अपनी सल्ला दिलाकर पिछड़ों के के तालमेल से फिर कश्यप, निषाद समुदाय को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए उत्तर प्रदेश की सरकार को साहस दिखाना होगा। बता दें कि इस संबंध में कश्यप निषाद मेहरा आदिवासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सांसद व वरिष्ठ भाजपा नेता गत दो दशकों से । आंदोलन कर आवाज उठाते आ रहे  हैं। लिहाजा,कश्यप निषाद मेहरा आदिवासी महासभा का एक ही प्रबल अनुरोध एवं अपेक्षा है कि जिस प्रकार अनुसूचित जाति की सूची के क्रमांक 24 में चमार के साथ धोसिया, झुसिया, जाटव को परिभाषित किया गया है, उसी प्रकार इस समुदाय की सभी पर्यायवाची जातियों को भी । अनुसूचित जाति की सूची में पूर्व से  अंकित गोंड, मझवार, तुरैहा के साथ परिभाषित करके इस समुदाय के विकास एवं सम्मान का रास्ता प्रशस्त किया जाए। इसी संदर्भ में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के सभी जिला अधिकारियों को कश्यप निषाद मेहरा आदिवासी महासभा के तत्वावधान में कश्यप समाज के प्रतिनिधियों द्वारा एक ज्ञापन प्रेषित किया गया इसलिए कश्यप, निषाद समुदाय को अनुसूचित जाति की सूची में  परिभाषित करने की कृपा करें।