पाक को कंगाल होने से कौन बचायेगा ?

पाक को कंगाल होने से कौन बचायगा? यह प्रश्न न केवल पाकिस्तान की आतंरिक राजनीति को  उथल-पुथल कर दिया है बल्कि मुस्लिम दुनिया और यूरोप-अमरिका का  विषय बना हुआ है। मुस्लिम दुनिया और अमेरिका-यूरोप में चर्चा का विषय यह  है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में  लगी आग में कौन अपना हाथ  जलायेगा, कौन अपने हाथ और अपने हित को बलि देकर पाकिस्तान को  बचायगा, क्या ऐसे  देश  का कंगालहोने  से  बचाना जरूरी है जो देश अपनी आतंकवाद की आउटसोर्सिग नीति से दुनिया को शांति आर सदभाव पर खतरा उत्त्पन्न  करता है।  यह जरूरी है कि पाकिस्तान वर्तमान में कई तरह के संकटों से जूझ रहा है। एक तो उसकी अर्थव्यवस्था विध्वंस होने के कगार पर खड़ी है, अर्थव्यवस्था की  रफतार को  थामने  की  शक्ति  पाकिस्तान की सरकार के अंदर में है नही, तो फिर अर्थव्यवस्था को विध्वंस  होने से कैसे बचाया जा सकता है, विदेशी मुद्रा भंडार लगभग समाप्त हो गया है, कर्ज की अदायती की आर्थिक शक्ति नहीं है, पाकिस्तानी रूपये की कीमत लगभग 30 प्रतिशत घट गयी जिन देशों और जिन संस्थानों से उम्मीद थी उन देशों ने और उन से उम्मीद थी उन देशों ने और उन संस्थानों ने या तो हाथ खींच लिये हैं, आर्थिक मदद देने से इनकार कर दिये हैं या फिर उन देशों और उन संस्थानों ने ऐसी शर्ते थोपी हैं जिसकी पूर्ति संभव नहीं है, उन शर्तों को स्वीकार संभव नहीं है उन शर्तों को स्वीकार करना खतरनाक है संप्रभत्ता के साथ करना खतरनाक है, संप्रभुत्ता के साथ समझौता करना हो सकता है। पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी समस्या अमेरिका और डोनाल्ड ट्रम्प हैं। डोनाल्ड ट्रम्प पाकिस्तान को किसी भी परिस्थिति में सबक सीखाना चाहते हैं पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था हैं, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था विध्वंस  होते  देखना चाहते हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने मुद्रा कोश को सीधे तौर पर हड़का दिया है कि अगर पाकिस्तान को आर्थिक सहायता दी तो फिर उसके दुष्परिणाम भयंकर होंगे?   उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान सहायता के लिए मुद्रा कोश में बार- बार दस्तक दे रहा है और पाकिस्तान को उम्मीद है कि मुद्रा कोश ही उसकी अर्थव्यवस्था के विध्वंस होने से  बचा सकता है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की दिन-रात की नींद गायब है, उसके मंत्रिमंडल के सदस्यों की भी नींद हराम हो गयी है। कहने का अर्थ यह है कि इमरान खान और उसकी सरकार दिन-रात यही कोशिश में लगी हुई है कि किस संस्थान और किस देश से आर्थिक सहायता हासिल की जायें। सबसे बड़ी समस्या सबसे बड़ी समस्या इमरान खान ही हैं, इमरान खान की साख ही नहीं है? अब यहां कोई प्रश्न कर सकता है कि इमरान खान की साख क्यों नहीं है? इसका उत्तर यह है कि इमरान खान मूल रूप से राजनीतिज्ञ नहीं हैं, इमरान  राजनीतिज्ञ होते तो उन्हें  पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, पाकिस्तान की संप्रभत्ता और पाकिस्तान की आतंरिक रूढिंयों की समझ होती और इन सभी समस्याओं से निकलने की क्षमता भी होती। इमरान खान  की छवि भी अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार फीट नहीं बैठती है। अंतर्राष्ट्रीय जगत में पहले से ही बात बैठी हुई है कि इमरान खान आतंकवाद के समर्थक हैं, आतंकवादियों को इमरान खान न केवल समर्थन देते हैं बल्कि संरक्षण भी देते हैं, आतंकवाद के बल पर चुनाव जीते हैं, सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि इमरान खान पाकिस्तान की सेना का मोहरा भी हैं। पाकिस्तान की सेना ने लोकतंत्र का हरण कर इमरान खान को प्रधानमंत्री बनवायी थी। यह आरोप पाकिस्तान की राजनीति में आम है, नवाज शरीफ ऐसे आरोप बार-बार लगाते हैं। अपनी छवि के लिए इमरान खान खुद जिम्मेदार हैं। इमरान खान ने चुनाव के दौरान अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की खूब खिल्लियां उठाया करते थे और कहा करते थे कि सत्ता में आने के तुरंत बाद अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, अंतर्राष्ट्रीय नियामको और अतंराष्ट्रीय वित्त संस्थानों को पाकिस्तान की शक्ति दिखायी जायेगी, उनके छोटे-मोटे कर्ज को उनके मुंह पर मार दिया जायेगा, पाकिसतन को किसी की सहायता की जरूरत ही नहीं है। पर जब सत्ता में इमरान खान आये तब उन्हें दिन में ही तारे दिखायी देने लगे। पाकिस्तान की विध्वंस हो रही अर्थव्यवस्था इमरान खान के सिर पर भूत की तरह नाचने लगी। कौन-कौन देश है और कौन-कौन संस्थाएं हैं जहां से पाकिस्तान की उम्मीद बनती है और पाकिस्तान आर्थिक सहायता के लिए हाथ-पैर मार रहा है? कोई एक नहीं बल्कि दर्जनों देशों से पाकिस्तान ने कोशिश की थी पर हर जगह उसे निराशा ही मिला है। सिर्फ दो जगह ही बचे हैं जहां पर पाकिस्तान की उम्मीद बची हुई हैं और जहां से पाकिस्तान को आर्थिक सहायता की उम्मीद बनती है। एक सउदी अरब है और दसरा मद्रा कोश है। सउदी अरब से पाकिस्तान की दोस्ती पुरानी है, पाकिस्तान को बार- बार सउदी अरब ने सहायता की है। पर कुछ सालों से पाकिस्तान और सउदी अरब के रिश्तों में खटास आ गयी है। यमन पर हमले में पाकिस्तान ने सउदी अरब का साथ नहीं दिया था, जिस कारण सउदी अरब नाराज है। एक अडचन यह है कि सउदी अरब की अर्थव्यवस्था खुद ही खराब हो रही है, उसकी अर्थव्यवस्था में इतनी शक्ति नहीं है कि वह पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को उबार सके। सउदी अरब ने पाकिस्तान को 300 करोड़ डालर का देने का वायदा किया है. ऐसा कहना पाकिस्तान की इमरान खान सरकार का है। पाकिस्तान को अगर सउदी अरब 300 करोड़ डॉलर दे भी देगा तो भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की समस्या दूर हो जायेगी. ऐसा नहीं माना जा सकता है। वर्तमान संकट से निकलने के लिए पाकिस्तान को करीब 1200 करोड़ अमेरिकी डालर की जरूरत है। मुद्राकोष ने इसके पहले 13 बार पाकिस्तान की मदद की है और पाकिस्तान को बेलआउट पैकेज दिया है। पर इस बार पाकिस्तान पर मुद्रा कोश की नजर टेढ़ी है।  शर्त काफी खतरनाक हैं और स्वीकार के लायक नहीं हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि मुद्राकोष ने चीनी कर्ज के संबंध में जानकारी मांगी है। मुद्रा कोश को आशंका है कि पाकिस्तान उसके वित्तीय सहायता का इस्तेमाल चीनी कर्ज की अदायगी में कर सकता है। यही कारण है कि मुद्राकोश ने पाकिस्तान से चीनी कर्ज से संबंधित सभी जानकारियां और वह भी तथ्य परख ढंग से मांगी है। जानना यह भी जरूरी है कि पाकिस्तान के लिए चीन की सहायता से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा अब पाकिस्तान के लिए गले की हड्डी बन गयी है, चीनी निवेश आधारित आर्थिक गलियार के निर्माण में पाकिस्तान को अंशदान करने में भारी समस्या हो रहा है। मलेशिया से भी पाकिस्तान उम्मीद कर रहा है। मलेशिया से पाकिस्तान हर साल 200 करोड़ डॉलर का व्यापार करता है, मलेशिया से पाकिस्तान खाद्य तेल पदार्थ खरीदता है। पर मलेशिया का कोई रूची  है या नहीं, यह स्पष्ट अभी तक नहीं हुआ है। इमरान खान की सत्ता स्थापित होते ही पाकिस्तान में मूल्य वृद्धि सातवे आसमान पर पहुंच गया है। जन जरूरतों पर आधारित खाद्य वस्तएं की कामत काफी बढ़ा है। आम आदमी त्राहिमाम कर रहा है, आम आदमी की क्रय शाक्त घट रहा है। अदर काई एसा उद्योग-धंदा  भी नहीं है जो आम जनता की समस्याओं को कम कर सके। इमरान खान के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक काल के समान खडे हैं। डोनाल्ड ट्रम्प यह नहीं चाहते है कि कोई पाकिस्तान की आर्थिक सहायता करे। पाकिस्तान को जो भी आर्थिक सहायता देगा उसे डोनाल्ड ट्रम्प के तांडव  से अभिशप्त होना होगा।