सीलिंग विरोधी आंदोलन पर कांग्रेस ने बुलाई बड़ी बैठक

जितने भी अवैध निर्माण हुए है उसमें भाजपा के साथ साथ खुद कांग्रेस भी भागीदार रही है। अब कोर्ट के आदेश से सीलिंग हो रही है तो कांग्रेस नौटंकी कर रही है। पिछले दो माह से सीलिंग के विरोध में आंदोलन कर रही प्रदेश कांग्रेस ने अपने इस आंदोलन को और धार देने के लिए  25 अक्टूबर को बड़ी बैठक बलाई है। बैठक में पार्टी के सभी छोटे-बड़े नेता शामिल होंगे। इसके बाद पार्टी सीलिंग के खिलाफ चल रहे आंदोलन को परी दिल्ली में चलाएगी। कांग्रेस ने एमसीडी की डीसील को  लेकर लाई गई पॉलिसी पर भी सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि इस पॉलिसी को पहले क्यों नहीं लाया गया। यमुनापार स्थित श्यामलाल कॉलेज में सीलिंग विरोध पुतला कार्यक्रम को पुलिस द्वारा रोकने और पुतले को जब्त करने से कांग्रेस के नेता खासे गुस्साए हुए हैं। वे लगातार आरोप लगा रहे हैं कि केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार उनके कार्यक्रम सेडर गई थी, इसलिए उनके इस कार्यक्रम में अड़्गा लगाने के लिए साजिश के तहत कार्यक्रम में बाधा डाली गई। कार्यक्रम में बाधा पड़ने के बावजूद वहां भारी संख्या में पार्टी नेता व वर्कर शामिल हुए थे। सीलिंग के खिलाफ लोगों की इसी नाराजगी को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश कांग्रेस अपने इस आंदोलन को बड़े स्तर पर ले जाना चाहती है, जिसके तहत मीटिंगों का भी दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि इसी रणनीति के तहत प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने 25 अक्टूबर को प्रदेश कार्यालय में एक बड़ी बैठक आयोजित की गई है। बैठक में सभी जिलों के नेताओं के अलावा प्रदेश स्तर के नेता भी शिरकत करेंगे। बताते हैं कि इस बैठक में निर्णय होगा कि कैसे राज्य स्तर पर सीलिंग विरोधी अभियान को आगे बढ़ाया जाए। इस बात की संभावना है कि इस बैठक में सीलिंग विरोधी अभियान के तहत सभी विधानसभा व वॉर्ड स्तर पर आंदोलन की रणनीति तय हो, जिसके तहत विरोधी पार्टियों के नेताओं के पुतला दहन बैठक समेत उनके निवास भी उग्र प्रदर्शन का निर्णय लिया जा सकता है। दूसरी ओर कांग्रेस ने नॉर्थ एमसीडी द्वारा लोगों को सीलिंग से बचाने के लिए लाई गई डीसील पॉलिसी पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के सीलिंग विरोधी चल रहे न्याय युद्ध के संयोजक व वरिष्ठ नेता मुकेश शर्मा का कहना है कि सीलिंग अभियान तो पिछले दस माह से चल रहा है। ऐसे में एमसीडी नेताओं को अब इस पॉलिसी की याद कैसे आई। उन्होंने आरोप लगाया कि असल में सीलिंग की आड़ में नेताओं और अफसरों ने जमकर भ्रष्टाचार किया और अब लगा कि कांग्रेस का आंदोलन चल रहा है तो लोगों को बचाने के लिए ड्रामेबाजी की गई। उन्होंने कहा कि अगर एमसीडी नेता लोगों को सीलिंग से बचाने को लेकर गंभीर थे तो इस पॉलिसी को दस माह पहले ही क्यों नहीं लाया गया। मुकेश शर्मा के अनुसार अगर एमसीडी केंद्र की कांग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए मास्टर प्लान के अनुरूप काम करे तो लोगों को सीलिंग से राहत मिल जाएगी।