उच्च शिक्षा की चुनौतियों को पहचानें : सुरेश प्रभु

नई दिल्ली, : केन्द्रीय वाणिज्य, उद्योग एवं नागरिक विमानन मंत्री श्री सुरेश प्रभु ने आज शिक्षा समुदाय से आग्रह किया कि उच्च शिक्षा की चुनौतियों को पहचानें और छात्रों को चौथी ओद्यौगिक क्रान्ति के लिए तैयार करें ताकि वे भविष्य में दुनिया का सामना कर सके। श्री प्रभु फिक्की के उच्च शिक्षा स मेलन के 14 वें संस्करण के दौरान सभ को संबोधित कर रहे थे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकर और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित इस स मेलन का विषय था ' युनिवर्सिटीज़ ऑफद यूचर यानि भविष्य के विश्वविद्यालय'। ‘‘सिर्फ सीखना ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि पूरानी चीजों को भूलना भी उतना ही मायने रखता है ताकि आप नई चीजों को सीख सके। इसके लिए हमें अपने दिमाग : सुरेश प्रभु खुले रखने चाहिए और हमेशा सीखने का प्रयास करना चाहिए।'' उन्होंने कहा। टेक्नोलॉजी के तेजी से बदलते इस दौर में यही समय की मांग है। समय के साथ ज्ञान पुराना हो जाता है। इसलिए समझदारी इसी में है कि हजम नई चीजों को सीखते रहें। मंत्री जी ने कहा कि इसके लिए सभी हितधारकों को आपसी साझेदारियों में एक साथ मिलकर प्रयास करने होंगे क्योंकि शिक्षा केवल युनिवर्सिटी में ही डिजाइन नहीं की जाती। श्री प्रभु ने ने इस मौके पर फिक्कीईवाय अप्रॉच पेपर ष्न्दपअमतेपजल व जीम नजनतम दृ ठतपदपदह कनबंजपवद 40 जव स्पमिषु का भी अनावरण किया। श्री आर सुब्रमण्यम, सचिव, उच्च शिक्षा, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने उन मूल सिद्धान्तों पर रोशनी डाली, जिन पर विश्वविद्यालयों का भविष्य आधारित है।