यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने विश्व स्ट्रोक दिवस पर लोगों को जागरूक किया

गाजियाबाद। स्थानीय यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी में लिए सही जीवनशैली अपनाई जाए और लक्षण दिखने पर चिकित्सकीय सहायता लेने में देर न की जाए। इस मौके पर यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में महाभारत में द्रोणाचार्य की भूमिका निभा चुके एक्टर सुरेंद्र पाल ने भी स्टोर्क बीमारी के बचाव हेतु जानकारी ली।अपने उद्बोधन में डॉ सुमंतो ने कहा कि स्ट्रोक को जितनी जल्दी चिकित्सा सुविधा मिलती है उसकी जान बचने की संभावनाएं उतनी अधिक होती है। इसलिए स्ट्रोक के कारण उसके लक्षणों की पहचान करना बेहद जरूरी है। स्ट्रोक की मुख्य वजह उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कोलेस्ट्रोल का बढ़ना है। इसलिए शारीरिक रूप से सक्रिय रहने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें। पौष्टिक और संतुलित आहार लें, शराब का सेवन और धूमपान न करें। उन्होंने बताया कि स्ट्रोक के मुख्य लक्षण, अचानक, चेहरे, बाजू या शरीर के एक हिस्से का काम न करना या कमजोर होना, बालन में दिक्कत होना, नजर न आना या दोहरी चीजें नजर आना, सिर चकराना और अचानक सिर में दर्द होना, चलने और संतुलन बनाने में दिक्कत होना प्रमुख है। आयोजित स्वास्थ्य वार्ता के दौरान वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर सुमंतो चैटर्जी एवं स्रोक टीम की डॉ रित ने लोगों को दिमाग के दौरे यानी कि ब्रेन स्ट्रोक से बचाव के तरीके बताये। इस मौके पर आयोजित जागरूकता व्याख्यान का उद्घाटन यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ पी एन अरोरा ने किया। अपने सम्बोधन में डॉ अरोड़ा ने बताया कि विश्व में प्रत्येक दो सेकेंड में एक व्यक्ति को ब्रेन स्ट्रोक होता है। मत । और हर छह सेकेंड में एक व्यक्ति की जान बेन स्टोक की वजह से जाती है। लिहाजा, बचाव ही स्ट्रोक का सबसे बेहतर इलाज है। डॉक्टर सुमंतो चटर्जी ने बताया कि स्टोक से बचाव के लिए हमें फास्ट होना चाहिए, ब्रेन स्ट्रोक या ब्रेन अटैक की स्थिति में । मरीज को तुरंत इमरजेंसी केयर की जरूरत होती है। इसलिए बेहतर यही है कि स्वस्थ रहते ही इससे बचे रहने के उपाय किये जाएँ।