यू पी में हो सकता है मंत्रिमंडल विस्तार..

केशव प्रसाद मौर्य का फिर बढ़ेगा कद


गठबंधन की चुनौतियों और लोकसभा चुनाव के  मद्धेनजर  उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ दीपावली से पहले मंत्रिमंडल में विस्तार की संभावना बढ़ने लगी है।हालांकि योगी मंत्रिमंडल  में फेरबदल की कवायद लंबे समय से चल रही है। पिछले वर्ष बीजेपी संगठन ने मंत्रिमंडल विस्तार पर यह कहकर रोक लगा दी कि अभी सरकार के एक वर्ष पूरे नहीं हुए हैं। हाल में विधानसभा सत्र के पहले भी फेरबदल की सगबगार हुई लेकिन प्रदेश कार्यसमिति और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के चलते बात नहीं बन पाई। हालांकि सत्रों के हवाले से अब ये खबर आ रही है कि सोमवार को दिन में 11 बजे योगी मंत्रिनंडल का विस्तार हो सकता है।संभावना है की 6 से  10 की संख्या में नये मंत्री को जगह मिल सकती है।बीजेपी हाईकमान ने भी सोमवार को सभी मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों को लखनऊ में रहने के आदेश दिया है। अब तक मिली जानकारी के अनसार पश्चिमी उत्तरप्रदेश सरकार के ब्राह्मण चेहरा और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण बाजपेयी को मंत्री  बनाया जा सकता है जबकि एक और चेहरा पूर्वी उत्तर प्रदेश से विद्या सागर सोनकर को भी मंत्री बनाया जा सकता है।जबकि ओमप्रकाश उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद राजभर के बगावती तेवर को देखते हुए अनिल राजभर को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है।अपना दल के अध्यक्ष और एमएलसी आशीण पटेल को मंत्री बनाया जा सकता है।मंत्री पद के लिए बीजेपी के तीन महामंत्री विद्यासागर सोनकर विजय बहादुर पाठक और अशोक कटारिया को दावेदार माना जा रहा है।एमएलसी यशवंत सिंह फैजाबाद के विधायक रामचंद्र यादव,बुलंदशहर के  विधायक विनय सिरोही समेत कई अन्य नामों को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही है।सरकार को लेकर भी अटकल लगाई जा रही हासरकार में गुर्जर समेत कुछ पिछड़ी जातियों के प्रतिनिधित्व पर भी खास जोर है। यानी मीरापुर से विधायक अवतार सिंह भड़ाना और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बेटे और नोएडा से विधायक पंकज सिंह को भी मंत्री पद का दावेदार माना जा रहा है। जबकि कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह और अनुपमा जायसवाल को कमजोर किये जाने की उम्मीद है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान चेहरा माने जाने वाले सुरेश राणा को भी कैबिनेट का दर्जा मिल सकत है तो वहाँ पश्चिमी यूपी के एक और चेहरा अशोक कटारिया को भी मंत्री पद से नवाजा जा सकता है। साथ ही मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और डॉ महेंद्र सिहको कैबिनेट  का दर्जा मिलने  की  उम्मीद  जताई गई है। कल ही  मीटिंग में सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिन जातियों के मंत्रियों  को हटाया जायेगा उन्ही जातियों के मंत्री फिर से बनाये जायेंगे ताकि जातीय समीकरण पर किसी तरह की समस्या न बन पाए। फेरबदल की सुगबुगाहट कुछ पुराने चेहरों की जगह पर अब नए चेहरों को लाने की जरूरत अवध, कानपुर, गोरखपुर और वेस्ट यूपी के  बीच क्षेत्रीय संतुलन । बिखरे विभागों को केंद्र सरकार के विभागों की तरह समन्वयन यूपी के 95 विखरे विभागों को 57 विभागों में समेटने का प्रस्ताव उपचुनाव के परिणामों को देखते संतुलन और  समन्वय की जरूरत लोकसभा चुनाव 2019 के पहले ही जातीय लोकसभ समीकरण पर खास फोकस । बैकवर्ड समाज पर खास फोकस इधर फिर से लोकसभा चुनाव के महाभारत भारत 2019 के युद्ध में बीजेपी बैकवर्ड समाज पर  डोरे डालने की कवायद भी तेज कर दी है।उत्तर प्रदेश में बैकवर्ड समाज को अपने पाले में करने के लिए एक बार फिर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को अपना सारथी बना रही है।पिछले दिनों बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारियों और  प्रदेश संगठन के बीच मैराथन बैठक बठक चली।जिसमें खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी माजूद थे। सूत्र के अनुसार बाजपा का शीर्ष कमान और संघ के लोग पिछड़ों के नाराजगी से काफी चिंतित है और बीजेपी ये जानती है कि यूपी में पिछड़ों के बिना वह लोकसभा  चुनाव में फतह नही कर सकती यही वजह है की  भाजपा 2014 में पिछड़ों पर दाव लगाकर विधानसभा चुनाव में भारी जीत हासिल की थी।ऐसे में शाह और संघ की बैठक में यह निर्णय लिया गया है की केशव प्रसाद मौर्य सूबे के हर जनपदों का दौरा करेंगे। इस दौरा में उस क्षेत्र की सांसदों के कार्यों की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र पांडेय के नेतृत्व में बनी कमेटी को सौपेंगे।इधर बीजेपी का प्रदेश नेतृत्व भी केशव मौर्या को  महिमामंडित करने में लगा है।  फेरबदल की संभावना के चलते मंत्रियों को भी अपने विभाग बदले जाने और छिन जाने का खतरा सताने लगा है। सवा साल की सरकार में कछ मंत्रियों ने बेहतर रिजल्ट दिए तो कई मंत्री जनता, विधायकों और कार्यकर्ताओं के  साथ ही मुख्यमंत्री और भाजपा संगठन की कसौटी पर भी खरा नहीं उतर सके। अब ऐसे लोगों पर खतरा मंडरा रहा है। हालांकि तजुर्बेकार कहते हैं कि सामने 2019 का लोकसभा चुनाव होने की वजह से मंत्रियों के - हटाने का जोखिम सरकार नहीं ले सकती है। निष्क्रिय और रिजल्ट नहीं दे पाने वाले भारी भरकम विभागों के मंत्रियों को कम महत्वपूर्ण विभाग दिया जा सकता है। वैसे कुछ मंत्रियों के  खिलाफ तो पार्टी के ही सांसद, विधायक और कार्यकर्ता मुखर हैं। ऐसे दो-तीन लोगों के हटाये जाने की भी चर्चा भी चल पड़ी है।उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री समेत 25 कैबिनेट मंत्री और नौ स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री हैं। जिस तरह 57 विभागों में ही पुनर्गठन की चर्चा है, उससे यह अंदाजा है कि विभागों का बंटवारा भी इसी अनुरूप होगा। भले पुनर्गठन के क्रियान्वयन में देरी हो लेकिन उसके प्रस्ताव के अनुरूप मंत्रियों को विभाग आवंटित किये जा सकते हैं।ऐसे में 13 राज्यमंत्री हैं। इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है।