14 साल में बना सिग्नेचर ब्रिज देश-दुनिया में इससे कम समय में हो गए बड़े-बड़े निर्माण

नई दिल्ली। भारत में सरकारों की लेटलतीफी के चलते जनहित से जुड़े प्रोजेक्ट्स का पूरा न होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन महज कछ साल में परा होने वाले : प्रोजेक्ट में 14 साल लग जाएं तो यह किसी अजबे से कम नहीं है। लेकिन यह अजबा दिल्ली में बने महंगे सिग्नेचर ब्रिज के साथ हुआ है। 1997 में इसकी परिकल्पना की गई थी और सात साल बाद यानी 2004 में इस सिग्नेचर ब्रिज का प्रोजेक्ट का तैयार किया गया था। फिर तीन साल बाद सन 2007 में इस प्रोजेक्ट को तत्कालीन दिल्ली सरकार ने मंजरी दी। इस प्रोजक्ट को सन 2010 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के समय पूरा होना था, लेकिन यह पूरा हुआ 8 साल बाद यानी 2018 में। कुलमिलाकर इस प्रोजेक्ट के निर्माण में 14 साल से ज्यादा का समय लग गया। इस दौरान लंबा समय बीतने से इस पर खर्च भी बढ़ा। इस परियोजना पर शुरू में 464 करोड़ की धनराशि निर्धारित की गई थी, लेकिन कुछ बदलाव के बाद योजना की लागत 2007 में दिल्ली सरकार ने 1100 करोड़ रुपये कर दी थी। अब इस परियोजना की राशि 1518.37 करोड़ रुपये पहुंच गई। ब्रिज करीब 700 मीटर लंबा है, जिसमें दोनों ओर चार-चार लेन हैं। यह 35.2 मीटर चौड़ा है। कुलमिलाकर डेढ़ दशक के दौरान इसका खर्च तकरीबन चार गुना बढ़ गया। सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में बड़े पुल और प्रोजेक्ट बनाए हैं, जिन्होंने दुनिया भर साख कमाई है। इस दौरान किसी प्रोजेक्ट में कम समय लगा तो किसी प्रोजेक्ट में उम्मीद से ज्यादा समय लगा। आइए ऐसे प्रोजेक्ट पर नजर डालते हैं, जिन पर समय भी ज्यादा लगा और पैसा भी। वहीं, कुछ प्रोजेक्ट निर्धारित समय में ही पूरे हो गए। भारत के जम्मू-श्रीनगर राज्य के हाईवे पर एशिया की सबसे लंबी चनैनी-नाशरी टनल का निर्माण हुआ है। 9.2 किमी लंबी इस सुरंग को बनाने में 2500 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इस सुरंग से हर मौसम में जम्मू और कश्मीर एक दूसरे से जुड़े रहते हैं, यानि बर्फबारी के दौरान भी जम्मू और श्रीनगर मार्ग अब अवरुद्ध नहीं रहता। खास बात ये है कि घाटी में एवलांच या स्नोफॉल के दौरान भी इस टनल के ऑपरेशन पर कोई दिक्कत नहीं होगी। सरंग से हर साल करीब 99 करोड़ रुपए के फ्यूल की बचत होगी। साथ ही रोज करीब 27 लाख का फ्यूल बचने की संभावना है। इसके ऑपरेशन की जिम्मेदारी नेशनल हाईवे अथॉरिटी यानि ॥ढू संभालेगी। इसका ट्रायल 9 से 15 मार्च के बीच पीक ऑवर्स और नॉन पीक ऑवर्स में किया जा चुका है। पर्यावरण को विशेष ध्यान रखा गया है। टनल के बाहर केवल स्वच्छ हवा ही जाएगी ताकि पर्यावरण प्रदूषित न हो। भारत का सबसे लंबा पुल ढोला सादिया पुल है। यह ब्रम्हपुत्र की एक सहायक नदी लोहिनू पर बना हुआ है। यह पुल असम के ढोला और अरुणाचल प्रदेश के सादिया शहर को जोड़ता है। इस पुल के बनने की शुरुआत 2011 में हुई थी, जिसकी निर्माण लागत 2056 करोड़ रुपए आई है।