अतिक्रमण से नाराज SC की सख्त टिप्पणी, कहा- आपकी कार्यशैली से ध्वस्त हो जाएगी दिल्ली

नई दिल्ली। अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई पर अधिकारियों के ढीले रवैये से नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर यही हाल रहा तो दिल्ली ध्वस्त हो जाएगी। गुरुवार को कोर्ट ने कहा कि जब किसी को दिल्ली की परवाह नहीं है तो हम क्यों परवाह करें? हम सुनवाई बंद कर देते हैं। अधिकारी यह बताने में नाकाम रहे कि दक्षिणी दिल्ली में किए गए सर्वे में कितने  अवैध निर्माण पाए गए और उन पर क्या कार्रवाई हुई। कोर्ट इसी बात से नाराज था। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पीठ सीलिंग मामले में सुनवाई कर रही है। गुरुवार को कोर्ट को बताया गया कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम और एलएनडीओ ने अवैध निर्माण के बारे में सर्वे किया है, लेकिन, जब कोर्ट ने सर्वे के आंकड़े मांगे तो पैरवी कर रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ने कहा कि आंकड़े उनके पास नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि चार महीने पहले सर्वे हुआ था और अभी तक आपके पास आंकड़े नहीं हैं कि कितना अवैध निर्माण है। एएसजी ने कल तक आंकड़े कहा- आपकी कार्यशैली देने की बात कही, लेकिन कोर्ट इस पर राजी नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि अभी अफसरों से पूछ कर बताइए। वकील अफसर से पूछने गए और इस बीच करीब 15 मिनट तक कोर्ट की कार्यवाही रुकी रही। वकील ने लौटकर बताया कि सर्वे हो गया है, परंतु रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है, वह तैयार हो रही है। कोर्ट ने कहा कि इसी से पता चलता है कि आपके अफसर कितने काबिल हैं। चार महीने में रिपोर्ट तक तैयार नहीं हुई। नाराज जस्टिस लोकुर ने कहा कि आप सर्वे में महीनों लेते हैं। फिर रिपोर्ट तैयार करने में महीनों लेते हैं। फिर नोटिस देने में महीनों लेते हैं। और फिर कार्रवाई में महीनों लगाते हैं। आपकी इस कार्यशैली से दिल्ली धराशायी हो जाएगी और फिर आप कहेंगे कि याचिका महत्वहीन हो गई है। इस पर एएसजी ने खेद प्रकट किया तो कोर्ट ने कहा कि आप खेद मत व्यक्त कीजिए। अपने अधिकारियों की काबिलियत देखिए। कोर्ट ने कल तक आंकड़े पेश करने का आदेश देते हुए मामले को शुक्रवार को फिर सुनवाई पर लगाया है। कोर्ट को बताया गया कि नियमों का उल्लंघन कार्यशैली से ध्वस्त करने वालों को सीलिंग से पूर्व नोटिस भेजने पर केंद्र और सुनवाई में मदद कर रहे न्यायमित्र के बीच बैठक नहीं हुई है। न्यायमित्र ने इस बारे में कोर्ट में सुझाव दिए। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 48 घंटे व अधिकतम 96 घंटों में कार्रवाई करने की प्रक्रिया वाले न्यायमित्र के सुझाव पर सरकार से निर्देश लेने के लिए एएसजी और डीडीए के वकील ने समय मांग  लिया है।