दीपावली में भारतीय जवानों के बीच नजर आएंगी रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण

देश की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण अरूणाचल प्रदेश के दिबांग वैली जिले की एक पोस्ट पर भारतीय जवानों के साथ दीपावली मनाने का ऐलान किया है।यानी आगामी 6 और 7 नवंबर को केंद्रीय रक्षा मंत्री भारतीय जवानों के साथ मौजूद रहेंगी।हालांकि ये पहली बार नहीं है, जब देश का कोई शीर्ष नेता जवानों के साथ दीपावली  मनाने जा रहा है। इससे पहले साल 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवानों के साथ दीपावली  मनाई थी। जबकि साल 2014 में पीएम बनने के बाद पीएम मोदी ने दीपावली  सियाचिन में सेना के जवानों के साथ मनाई थी।लेकिन अरुणाचल प्रदेश पर चीन का विरोध किसी से छिपा नहीं है। जब भी भारत का कोई शीर्ष नेता अरुणाचल प्रदेश की यात्रा करता है तो चीन अपना विरोध दर्ज कराता ही है। लेकिन इस बार तमाम विरोध के बावजूद भारत ने चीन को अपने अंदाज में जवाब देने की तैयारी कर ली है। माना तो ये जा रहा है कि केंद्रीय रक्षा मंत्री का अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सैनिकों के साथ दिवाली मनाने का फैसला चीन को भारत के कड़े रुख का संदेश देता है।ऐसे हालात में अब देखना ये है कि इस मसले पर चीन का क्या जवाब आता है।क्योंकि चीन हमेशा ये दावा करता है कि अरुणाचल प्रदेश दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है। वह भारतीय शीर्ष अधिकारियों के इस इलाके के दौरे पर नियमित रूप से आपत्ति जताता आ रहा है। इससे पहले भी पिछले साल चीन ने भारत की रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण के अरुणाचल दौरे का विरोध किया था। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा 3,488 किमी लंबी है। सीमा विवाद के हल के लिए दोनों पक्षों की ओर से लंबे समय से बातचीत जारी है।आपको याद होंगा पिछले साल ही रक्षा मंत्री सीतारमण सिक्किम में भारत चीन सीमा पर स्थिति नाथू ला गई थीं। वहां उन्होंने सीमा के दूसरी ओर खड़े पीपल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिकों का अभिवादन भी किया था। गौरतलब है कि रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने चीन की सीमा से लगे अरुणाचल प्रदेश के सुदूर अंजॉ जिले में सेना की अग्रिम चौकियों का दौरा भी किया था।इसके साथ ही रक्षामंत्री ने चीनी सीमा पर रक्षा तैयारियों को जायजा लिया था। 56 साल बाद ग्रामीणों को 38 करोड़ का मुआवजा मिला हालांकि अभी हाल ही में भारत-चीन युद्ध के 56 साल बाद अरुणाचल प्रदेश के ग्रामीणों को 38 करोड़ रुपए का मुआवजा मिला है। आपको याद होंगा भारत और चीन के बीच 1962 में यह युद्ध हुआ था। और ये मुआवजा इसलिए दिया गया है। क्योंकि युद्ध के दौरान सेना ने अपने बेस, बंकर और बैरक बनाने के लिए ग्रामीणों की जमीन का इस्तेमाल किया था। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजीजू और अरुणाचल के मख्यमंत्री पेमा खांड ने एक कार्यक्रम में गांव वालों को चेक बांटे।इस कार्यक्रम में रिजीजू ने कहा कि गांववालों को इसलिए 37.73 करोड़ रुपए दिए गए क्योंकि वो सारी सामुदायिक जमीनें थी।