शासन के द्वारा की जाने वाली संकीर्ण कार्रवाई पर उठे सवालिया निशान?

 गाजियाबाद। जीडीए द्वारा इंदिरापुरम क्षेत्र में घरों में दुकान चलाने वालों को जो नोटिस जारी किये गए हैं, उससे दुकानदार पशोपेश में पड़ गए हैं। त्यौहारी महीना होने के चलते उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा महीना होने के चलते उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा कि आखिरकार अपने ही हाथों अपनी रोजी-रोटी को कैसे बंद कर दें। बता दें कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने वैसे दुकानदार जो घरों में दुकानें चला रहे हैं, उन्हें खुद ही अपनी दुकानें बंद करने के वास्ते महज 15 दिन का समय दिया है। जबकि इसी एक पखवाड़े में दीवाली और छठ जैसे दो महत्वपूर्ण त्यौहार भी हैं। खासकर दीवाली को तो कारोबारी पर्व भी समझा जाता है। लेकिन जीडीए द्वारा मकानों में चल रही दुकानों को खुद से बंद करने के वास्ते दी गई नोटिस के बाद आलम यह है कि कई दुकानदार अब अपनी अपनी दुकानों के रंग-रोगन से भी परहेज करने लगे हैं। खबर है  कि  गत दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में जीडीए द्वारा इंदिरापुरम में यह कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बताया गया है कि जीडीए उपाध्यक्ष कंचन वर्मा के आदेश पर ये नोटिस जारी किए गए हैं। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, इंदिरापुरम क्षेत्र में घरों में तकरीबन 14,994 दुकानें चल रही हैं, जिससे अमूमन सड़क जाम की स्थिति पैदा हो जाती है। यही नहीं, बाजारू शोर से आसपास की घरों की शांति में भी खुलल पड़ जाती है। जिससे क्षुब्ध होकर आरडब्ल्यूए को इलाहाबाद हाइकोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी। जिसके बाद यह अप्रत्याशित फैसला आया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, जीडीए प्रवर्तन जोन-6 के प्रभारी अधिशासी अभियंता अनिल कुमार सिंह ने अपनी पूरी टीम के साथ उक्त आशय की नोटिस देने की कार्रवाई की है। जिसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा 26(2) के तहत घर में दुकान चलाना दंडनीय अपराध है, क्योंकि भू-उपयोग के विपरीत इसका प्रयोग किया जा रहा है। उक्त अधिनियम के मुताबिक, आवासीय क्षेत्र में कॉमर्शियल गतिविधि मान्य नहे आवासीय क्षेत्र में कॉमर्शियल गतिविधि मान्य नहीं है। लिहाजा, नोटिस में कहा गया है कि 15 दिन के भीतर खुद ही दुकानें बंद कर ली जाए, अन्यथा जीडीए 16वें दिन पुलिस टीम के साथ दुकानों को सील करेगा। बताते चलें कि फेडरेशन ऑफ अपार्टमेंट ऑनर एसोसिएशन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसके मद्देनजर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए एसएसपी को स्पेशल टीम गठित कर दुकानों को बंद कराने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, वहीं जीडीए उपाध्यक्ष कंचन वर्मा को इस मामले में स्वयं शपथ पत्र दाखिल करने के भी आदेश दिए हैं। यही वजह है कि जीडीए की नोटिस के बाद अब दुकान चलाने वालों में हड़कंप मच गया है। उल्लेखनीय है कि जीडीए के पूर्व के सर्वे में शहर में तकरीबन 8500 दुकानें घरों में चलने की रिपोर्ट आई थी, जिसके आलोक में दुकानदारों को नोटिस जारी किए गए थे। लेकिन एक अनुमान के मुताबिक, पूरे शहर में वर्तमान में लगभग 30 हजार से भी ज्यादा दुकानें के घरों में संचालित होने की चर्चा है। इसलिए यह सवाल उठना लाजिमी है कि सिर्फ इंदिरापुरम में ही कार्रवाई क्यों? उसके पड़ोस में स्थित वैशाली, वसंधरा और कौशाम्बी में क्यों नहीं? क्या इसके लिए भी आरडब्लूए को कोर्ट में अलग अलग रिट डालने पड़ेंगे?