दिल्ली मेट्रो के लगातार खराब हो रहे हालात

नई दिल्ली। तीसरे फेज का काम पूरी तरह खत्म होने के बाद 380 किलोमीटर के साथ दुनिया की सबसे बड़ी मेट्रो बनने जा रही दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन  पिछले एक साल से बदनाम हो रही है। दिल्ली मेट्रो की बदनामी के पीछे ट्रेनों में आ रही लगातार तकनीकी खामी है, जिससे मेट्रो चलते-चलते रुक जाती है। पिछले दो दिनों (बुधवार-बृहस्पतिवार) से लगातार तकनीकी खामी के चलते मेट्रो के हजारों यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बुधवार को दोपहर जहां ब्लू लाइन पर तकनीकी खामी से मेट्रो ट्रेनें दो घंटे तक धीमी गति या फिर रुक-रुक कर चलीं तो बृहस्पतिवार सुबह भी यही स्थिति रही। सुबह 2 घंटे तक ब्लू लाइन रूट पर तकनीकी खामी ने मेट्रो के पहिये थाम लिए। आलम यह हुआ कि स्टेशनों पर अफरातफरी का माहौल बन गया। पीक आवर होने की वजह से लोग ज्यादा परेशान नजर आए। वहीं, दिल्ली मेट्रो के प्रवक्ता ने बताया कि द्वारका से करोल बाग सेक्शन के बीच शाम को तीन बजे के बाद सिग्नल प्रणाली और स्वचालित ट्रेन नियंत्रण प्रणाली में बार-बार दिक्कत आई जिसके कारण मेट्रो सेवा प्रभावित हुई। सिग्नल प्रणाली के काम नहीं करने से ट्रेनों को मैनुअल प्रणाली से चलाया गया। इससे ट्रेनों की गति धीमी रही और कई ट्रेनों को बार- बार रोक-रोक कर चलाया गया। दिल्ली मेट्रो में लगातार आ रही तकनीकी खराबी से इसकी साख पर बट्टा लग रहा है। ब्लू लाइन समेत कई रूट्स पर खामियों के चलते अब दिल्ली मेट्रो बदनाम होने लगी है। लोग तो यहां रहे हालात तक कहने लगे हैं कि पहले तय समय के लिए जानी जाने वाली मेट्रो गंतव्य तक समय से पहुंचाएगी? इस पर संदेह होने लगा है। मेट्रो की यह साख एक दिन में खराब नहीं हुई है, बल्कि पिछले दो साल के दौरान तकनीकी खामी के मामले बढ़ गए हैं। आलम यह है कि तकरीबन हर महीने में एक से दो बार मेट्रो के किसी न किसी रूट पर तकनीकी खामी आती है और इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है यात्रियों का। इस तरह आ रही तकनीकी खराबी ने यात्रियों के मन में भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर मेट्रो में बार-बार खराबी क्यों आ रही है और खराबी भी ऐसी कि जिन्हें तुरंत ठीक नहीं किया जा सके। अक्सर खामी के दौरान मेट्रो ट्रेनों को आधे घंटे से अधिक समय तक रोके रखना पड़ता है। इन खराबियों की वजह से मेट्रो की पूरी लाइन प्रभावित होती है और हजारों मुसाफिरों को परेशानी उठानी पड़ती है। पिछले एक साल से दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन  ने तकनीकी खराबियों को दूर करने के लिए कवायद शुरू की है, लेकिन सफलता नहीं मिली है। मेट्रो के प्रवक्ता की मानें तो मेट्रो एक रनिंग सिस्टम है और इसमें ऑपरेशनल खराबी आना लाजमी है। वहीं, डीएमआरसी ने यह भी माना है कि बार-बार आ रही तकनीकी दिक्कत और इसे ठीक करने में होने वाली देरी चिंता का सबब है। इसके लिए अब मेट्रो ने आंतरिक तौर पर अपनी जांच पड़ताल कई महीने से चल रही है, लेकिन इस पर सार्थक काम अब तक नहीं हो पाया है। मेट्रो से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, ब्लू लाइन एक व्यस्त लाइन है। और यहां पीक आवर्स में मेट्रो ट्रेनें अधिक फीकेंसी चलाई जाती हैं। ऐसे में अगर मेट्रो के किसी हिस्से में खराबी आती है, तो इसका असर पूरी लाइन पर दिखने लगता है। पीक आवर में हालात बदतर हो जाते हैं।