जीडीए के इंटरनल ऑडिट में गिर सकती है 18 बिल्डरों पर गाज




गाजियाबाद। रिहायशी बिल्डिंग प्रोजेक्ट का पूरा पैसा अन्य प्रोजेक्टोंं में डायवर्ट करने वाले बिल्डरों पर शीघ्र ही रियल स्टेट रग्युलेटरी अथॉरिटी (रेरा) का शिकंजा कसा जाने वाला है। लिहाजा, उसके निर्देश पर जीडीए ने जिले के 18 बिल्डरों की इंटरनल ऑडिट कराने का फैसला किया है, ताकि यह पता चल सके कि बिल्डरों द्वारा निर्माणाधीन प्रोजेक्ट का पैसा किसी अन्य प्रोजेक्ट में यूज तो नहीं किया गया। क्योंकि यदि ऐसा पाया गया तो इसी इंटरनल ऑडिट के आधार पर गाज़ियाबाद के 18 बिल्डर रियल स्टेट रग्युलेटरी ऑथोरिटी (रेरा) के  निशाने पर आ सकते हैं।मिली अद्यतन जानकारी के मुताबिक, केडीपी एमजीआई घरौंदा को 330 फ़्लैट, रेड एप्पल रेजिडेंसी को 300 फ़्लैट, मंजू जे होम्स को 1680 फ़्लैट, ओजोन क्लासिक को 577 फ़्लैट, अपरिमेय एन्क्लेव को 368 फ्लैट, केएम रेजिडेंसी को 407 फ्लैट, अजनारा इंटीग्रिटी को 2303 फ्लैट, गुलमोहर गार्डन को  1949 फ्लैट, अंतरिक्ष अपार्टमेंट को 1120 फ्लैट, अंसल सुशांत एक्वापॉलिस को 26 टॉवर, अंबा होम्स को 642 फ्लैट, लॉ रॉयल टू को 276 फ्लैट, सर्वोत्तम श्री को 784 फ्लैट, साया एस क्लास को 336 फ्लैट, एंजिल जुपिटर को 642 फ़्लैट तैयार करने थे। लेकिन वो अभी तक तैयार नहीं हो पाए। खबर है कि इंटरनल ऑडिट होने के बाद इन बिल्डरों पर लोटस थ्रीसी के तीन बिल्डर्स की तरह ही कोई बड़ी गाज गिर सकती है। बता दें कि दिल्ली पुलिस ने आर्थिक अपराध के आरोप में लोटस थ्रीसी के तीन बिल्डर्स को 140 करोड़ रुपये दूसरे प्रॉजेक्ट में डायवर्ट किए जाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। वहीं गाजियाबाद के भी 18 प्रॉजेक्टस ऐसे हैं जहां पर बायर्स के पैसे को दूसरे प्रॉजेक्ट में डायवर्ट किए जाने का अंदेशा जीडीए के अधिकारियों को भी है। यही वजह है कि पिछले दिनों रेरा के अफसरों के साथ हुई बैठक में ऐसे 18 बिल्डर्स की सूची पेश की गई, जिसमें रेरा की तरफ से इनका इंटरनल ऑडिट करवाए जाने का निर्देश हुआ। जिसके बाद जीडीए ने इंटरनल ऑडिट कराने का फैसला लिया है।आधिकारिक सूत्रों की मानें तो फिलवक्त इस मामले में विधिक राय के लिए विधि अनुभाग को फाइल भेज दी गई है। यदि उसकी रजामंदी मिलती है और फिर जीडीए की तरफ से  बिल्डरों का इंटरनल ऑडिट करवाया जाता है तो आम्रपाली और लोटस थ्रीसी जैसे बड़े गड़बड़झालों से जुड़े मामले का खुलासा गाजियाबाद में भी जल्द होगा। क्योंकि यहां पर भी  बिल्डरों ने एक प्रॉजेक्ट को बेचकर बिना पजेशन दिए ही दूसरे प्रॉजेक्ट में उससे अर्जित पैसों को लगा रखा है। जिसकी वजह से उनका पहला प्रॉजेक्ट अभी तक अटका पड़ा है। जबकि बायर्स पजेशन के लिए कई साल से जीडीए और बिल्डर्स के ऑफिस का चक्कर काट रहे हैं।उल्लेखनीय है कि इसके चलते ही 6 बिल्डर्स से अधिक पर  जीडीए एफआईआर भी दर्ज करवा चूका है। बावजूद इसके,  पुलिस की तरफ से कोई भी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। जीडीए सूत्रों की मानें तो अभी तक इन 18 बिल्डर्स के चक्कर में जनपद और उसके आसपास के इलाकों के करीब नौ हजार से अधिक बायर्स फंसे हुए हैं, जिनमें 6 बिल्डर्स ऐसे हैं जिन पर जीडीए एफआईआर तक दर्ज करवा चुका है। लेकिन अभी भी वहां पर काम नहीं चल सका है। यही वजह है कि ऐसे सभी प्रॉजेक्टस को जीडीए ने सी कैटिगरी में डाल रखा है। जिसकी वजह से बिल्डर्स एफआईआर के बाद भी खुलेआम घूम रहे हैं।इस सम्बन्ध में ओएसडी वी.के. सिंह ने बताया कि महागुनपुरम बिल्डर, अंतरिक्ष बिल्डर, मंजू जे. होम्स, एसवीपी इंफ्रास्ट्रक्चर और फ्रैंडलैंड समेत कुछ अन्य बिल्डर्स पर एफआईआर दर्ज हो चुके हैं। लिहाजा, इंटरनल ऑडिट के बाद बायर्स को भी फायदा होगा। क्योंकि अभी तक प्रॉजेक्ट के नाम पर बिल्डर्स ने खरीदारों से पैसे लेकर दूसरे प्रॉजेक्टस में इनवेस्ट कर दिए हैं। जिसकी वजह से उनका पुराना प्रॉजेक्ट निर्धारित समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आगे बताया कि इसमें बायर्स का जिस प्रॉजेक्ट में पैसा फंसा हुआ है, उस प्रॉजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा करवाने में मदद की जाएगी। बाकी प्रॉजेक्टस के काम को बंद करवाया जा सकता है, जिसमें पुराने प्रॉजेक्ट का पैसा फंसा दिया गया होगा।खबर है कि जीडीए की इस रणनीति के बाद बिल्डरों में हड़कम्प मचा हुआ है। कई तो अपने जोड़ घटाव गुना भाग में अभी से जुट गए हैं, ताकि जीडीए के शिकंजे में फंसकर धन जाया करने से बचा जा सके।