कमल संदेश पद यात्रा में झंडी दिखाने के बाद 'माननीय' हुए गायब



गाजियाबाद। आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के उपलक्ष्य में कमल संदेश पद यात्रा निकालने का निर्णय लिया, जिसमें भाजपाइयों ने प्रदेश और केन्द्र सरकार की योजनाओं क़ो जन-जन तक पहुंचाने का बीड़ा भी उठाया और इसकी शुरूआत भी पार्टी द्वारा पूरे जोर-शोर से की गई। यही वजह है कि गत एक दिसम्बर को इस पदयात्रा को केन्द्रीय मंत्री, राज्यमंत्री से लेकर विधायकों ने भी अलग अलग जगहों से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस पदयात्रा का लक्ष्य 15 दिसंबर को पूरा होगा, जिसमें भाजपाइयों को 150 किलोमीटर तक चलकर अपने सरकार की योजनाओं का प्रचार करना था।लेकिन हैरत की बात है कि पदयात्रा की रफ्तार आखिरी समय पर जिस तरह से धीमी पड़ी, उससे स्पष्ट है कि लोकसभा चुनाव पर इसका असर पड़ेगा। यह बात अलग है कि कार्यकर्ता भाजपा का झंडा लेकर फेसबुक पर अपनी अपनी फोटो डालकर यह जरूर बता रहे हैं कि हमने कमल संदेश पद यात्रा में सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं का प्रचार आज जगह-जगह किया। लेकिन दिलचस्प बात तो यह है कि जिन माननीयों ने कमल संदेश पद यात्रा की शुरूआत की और लंबे-लंबे भाषण देकर कार्यकर्ताओं को संबोधित किया, वह नेता खुद ही इस पद यात्रा से गायब हैं। एक दो नहीं बल्कि कई ऐसे नाम गिनाए जा सकते हैं।हालांकि, अब पद यात्रा के दौरान कम समय बचा है फिर भी शहर के लोग अब अंतिम चरण में भी अपने अपने माननीयों का इंतजार कर रहे हैं। कुछ शहरवासियों ने तो यह तक कह दिया कि हम तो केन्द्रीय मंत्री और राज्यमंत्री का इंतजार कर रहे हैं और उन नेताओं का भी बाट जोह रहे हैं जिन्होंने हमारे क्षेत्र में आकर कमल के फूल पर वोट डालने का आग्रह हम लोगों से किया था, लिहाजा हमनें वोट भी डाल दिया और सरकार भी बन गई।हमारे माननीय सांसद से केंद्रीय मंत्री भी बन गए, लेकिन हमारे क्षेत्रों की जो समस्याएं हैं वह अभी भी ऐसे ही पड़ी हुई हैं जैसे पहले कभी हुआ करती थीं। इसलिए माननीय आएं तो हम उन्हें अपनी समस्याओं से दो चार कराएं।अब जो भी लोग यह सब कह रहे हैं, उनकी बातों में दम तो है।आखिर पद यात्रा में 150 किलोमीटर चलने का आह्वान करने वाले भाजपा के दिग्गज क्या अपने ऑफिस में बैठकर ही पदयात्रा की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। जबकि, जनता उनका इंतजार कर रही है। इनका इंतजार करते करते उनकी आंखें पथरा गई हैं। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव नजदीक है, जिसके मद्देनजर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने भाजपाइयों को लोगों से रूबरू कराने के लिए ही इस पदयात्रा का आयोजन करने का निर्णय लिया था, लेकिन जिस प्रकार गत
मंगलवार को भाजपा का प्रदर्शन मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ में अपेक्षा से कमजोर देखने को मिला, उससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि अब भाजपा की राह यहां भी उतनी आसान नहीं है।अकेले मोदी के चेहरे पर भाजपा अब किला फतह नहीं कर सकती है। इसलिए अब उन नेताओं को भी लोगों के बीच जाकर उन्हें संतुष्ट करना होगा जिन्हें जनता ने चुनकर विधायक और सांसद बनाकर भेजा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या जनपद के माननीय लोगों के बीच पहुंचकर पदयात्रा में शामिल होंगे या फिर आखिरी समय में पद यात्रा के समापन पर ही पहुंचकर कार्यकर्ताओं को बधाई देंगे?