जाट नेता ब्रजपाल सिंह तेवतिया की लोस टिकट दावेदारी की उपेक्षा करना बीजेपी को पड़ेगी भारी






गाजियाबाद। गाजियाबाद लोकसभा चुनाव 2019 के लिए टिकट लेने की होड़ में जिन बीजेपी नेताओं के नाम चर्चे में हैं, उनमें जाट नेता चौधरी ब्रजपाल सिंह तेवतिया सब पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। पारंपरिक मीडिया, सोशल मीडिया और गांव-मुहल्ले में जिस तरह की हवा अपने पक्ष में चौधरी ब्रजपाल सिंह तेवतिया बनाते जा रहे हैं, उससे बीजेपी के जिला नेतृत्व, प्रदेश नेतृत्व और राष्ट्रीय नेतृत्व की जान सांसत में पड़ी हुई हैं। 
 

कहना न होगा कि स्थानीय उम्मीदवार बनाम बाहरी उम्मीदवार का जो सधा दांव श्री तेवतिया ने चला है, उसके मद्देनजर यदि उनकी टिकट की दावेदारी की पार्टी उपेक्षा भी करती है तो भविष्य में उसे यह सुरक्षित सीट भी गंवानी पड़ सकती है। लेकिन जगह जगह पर प्रायोजित करवाई जा रही अपनी मीटिंग में तेवतिया जिस तरह से पीएम नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और उनके विधायक पुत्र पंकज सिंह से जुड़े प्रसंगों की चर्चा करते हैं, उससे स्पष्ट है कि पार्टी के दिग्गज नेताओं की शह पर ही उनका यह अभियान चल रहा है, और इसकी सफलता पर संदेह करना सियासी मूर्खता होगी।
 

जानकार बताते हैं कि जबसे गाजियाबाद के सीटिंग कंडीडेट जनरल वी के सिंह, जो कि केंद्र सरकार के कद्दावर विदेश राज्य मंत्री भी हैं, ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के गुट से जबसे अपनी निष्ठा बदलकर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अपने सियासी ताल्लुकात गहरे किये हैं, जो गाहे बगाहे दिख भी जाते हैं, तबसे गृह मंत्री राजनाथ सिंह की लॉबी जनरल सिंह के पांव गाजियाबाद से उखाड़ने पर तुली हुई प्रतीत हो रही है। 

 

बहरहाल, जिस तरह से सांसद जनरल सिंह को बाहरी करार देते हुए उनके कार्यक्रमों से यदा कदा स्थानीय नेता, विधायक गण, महापौर, वार्ड पार्षद आदि लोग सुनियोजित दूरियां बनाकर चलते दिखाई देते हैं, और कभी कभी पार्टी नेताओं की होर्डिंग से उनके फोटो तक गायब कर दिए जाते हैं, इन सबका एक ही मकसद बताया जा रहा है कि जनरल सिंह खुद को हूट आउट समझकर खुद ही बैठ जाएं या फिर हार मानकर यहां से  टिकट लेने की न सोचें और कहीं और की दावेदारी प्रस्तुत करें। लेकिन इन सब बातों से बेपरवाह जनरल सिंह अपनी नीति और अपने लोगों को साधकर निरन्तर आगे बढ़ रहे हैं, जिससे पार्टी भी उन्हें हल्के में नहीं लेना चाहती है। क्योंकि जनरल सिंह खुद भले ही दूसरी बार यहां से न जीतें, लेकिन यदि रुष्ट हो गए तो दूसरे प्रत्याशी को हरवा सकते हैं, क्योंकि उनकी स्वजातीय लॉबी जितनी योगी आदित्यनाथ पर फिदा है, उतनी ही मोदी-शाह से चिढ़ती भी है।

 

जानकारों का कहना है कि बीजेपी नेता ब्रजपाल सिंह तेवतिया जनपद के सर्वमान्य नेता हैं, सबके सुख-दुख में खुद ही शामिल रहते हैं। सभी जातीय समूहों पर उनकी अच्छी पकड़ है। अल्पसंख्यक वर्ग में भी उनकी गहरी पैठ है। यूपी विस चुनाव 2017 के लिए भी मुरादनगर विस सीट हेतु उन्होंने अपनी दावेदारी ठोकी थी, क्योंकि मुरादनगर नगरपालिका के पहले चेयरमैन होने के नाते क्षेत्र पर उनकी अच्छी पकड़ रही है। लेकिन तब मौजूदा विधायक अजित पाल सिंह त्यागी उनपर भारी पड़े और टिकट लेकर विधानसभा भी पहुंच गए। इसलिए इस बात के आसार प्रबल हैं कि पार्टी के अंदरूनी सर्वे में मौजूदा सांसद श्री सिंह की लोकप्रियता यदि घटती मिली तो बीजेपी उनका टिकट काटकर श्री तेवतिया को भी दे सकती है।

 

इस बात में कोई दो राय नहीं कि स्थानीय नेता बनाम बाहरी नेता के सवाल पर बीजेपी नेताओं की जो गोलबंदी दिखाई दे रही है, उसके चौंकाने वाले परिणाम निकट भविष्य में सामने आ जाये तो कोई हैरत की बात नहीं होगी। क्योंकि गाजियाबाद के पूर्व सांसद राजनाथ सिंह हों या फिर मौजूदा सांसद अवकाशप्राप्त जनरल विजय कुमार सिंह, इनका स्थायी ठिकाना दिल्ली में ही रहा, जिससे गाजियाबाद के लोगों को अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए बार बार दिल्ली का तो चक्कर लगाना पड़ा, लेकिन जब काम भी नहीं हुआ तो अब वैसे भुक्तभोगी लोग चाहेंगे ही कि भला हो या बुरा हो, लेकिन उनका नेता उनकी मिट्टी से जुड़ा हो, उनके बीच का हो जो उनके सुख-दुःख में काम आए। जिसकी नातेदारी-रिश्तेदारी जनपदवासियों के साथ हो, ताकि वह उनकी उपेक्षा नहीं करे।