कलियुगी पिता ने दो बच्चों को जहर देकर लगा ली फांसी, तीनों की मौत








गाजियाबाद। सिहानी गेट थाना क्षेत्र के नूरनगर इलाके में मंगलवार तड़के एक रेस्टोरेंट मालिक ने अपने पुत्र व पुत्री को रसमलाई में जहर देकर हत्या कर दी। उसके बाद उसने स्वयं भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। हैरत की बात है कि रेस्टोरेंट मालिक ने हत्या करने से पहले  रात में बच्चों के साथ कैरम बोर्ड भी खेला और सोने से पहले उन्हें जहरीला पदार्थ मिलाकर रसमलाई भी खिलाई। पुलिस को शंका है कि जहर देने के बाद रेस्टोरेंट मालिक ने अपने बच्चों का गला भी दबाया। अंदेशा है कि रेस्टोरेंट मालिक ने अपनी पत्नी और छोटे बेटे को भी मारने का प्रयास किया। लेकिन पत्नी ने सुबह काम पर जल्दी जाने और छोटे बेटे की परीक्षा होने के कारण वह उसे दूसरे कमरे में लेकर सोने को चली गई थी।

 

बता दें कि नूरनगर इलाके में बाबा मोहन लाल मंदिर के निकट गली में रेस्टोरेंट मालिक सुन्दर (42 वर्ष) परिवार समेत रहता था, जिसका कुल्लू मनाली (हिमाचल) मार्ग पर एक रेस्टोरेंट था। खबर है कि पिछले दो महीने से बर्फबारी के कारण उसका काम-धंधा बंद था और वह अपने घर पर बच्चों के साथ रह रहा था। परिवार के लोगों के मुताबिक, सुन्दर ने सोमवार रात को पुत्र तुषार (15 वर्ष) व पुत्री माही (12 वर्ष) के साथ सोने से पहले कैरम बोर्ड खेला। इस दौरान उसने अपनी पत्नी शशि को भी खेलने के लिए बुलाया, जो आंगनबाड़ी में काम करती है। चूंकि उसे सुबह में जल्दी अस्पताल जाना था, इसलिए उसने कैरमबोर्ड खेलने से मना कर दिया। दूसरे छोटे बेटे अमन (6) वर्ष का पेपर होने के कारण पत्नी उसे लेकर  दूसरे कमरे में सोने चली गई। अलबत्ता, कैरम बोर्ड खेलने के बाद मौके की नजाकत का फायदा उठाकर रेस्टोरेंट मालिक सुन्दर ने जहर मिला कर रसमलाई अपने बच्चों को खिलाई।

 

खबर है कि रात में करीब दो बजे शशि जब उठी तो दूसरे कमरे में जाने पर उसकी चीख निकल गई, क्योंकि कमरे में पति सुंदर का शव चादर से लटका हुआ था। फिर उसकी चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। लोगों ने चादर काट कर सुंदर को नीचे उतारा। इस बीच पुत्र तुषार और पुत्री माही के भी मृत पड़े होने की सूचना मिलते ही पूरे मोहल्ले में सनसनी फैल गई। आनन फानन में लोगों ने पुलिस को सूचना दी। फिर मौके पर पहुंची पुलिस ने आशंका जताई कि दोनों बच्चों को जहरीली रसमलाई खिलाने के बाद उनका गला भी दबाया गया था, क्योंकि बच्चों के गले पर उंगलियों के स्पष्ट निशान दिखाई दे रहे थे।

 

सूचना पाकर मौके पर पहुंचे एसपीसिटी श्लोक कुमार ने बताया कि सुन्दर के कमरे से एक कागज मिला है, जिसमें उसने कर्ज वाले लेन देन का हिसाब-किताब किया हुआ था। लिहाजा, आशंका जताई जा रही है कि कर्ज चुकता न कर पाने के चलते ही उसने तनाव में बच्चों की हत्या जहर देकर कर दी, फिर स्वयं भी फांसी लगाकर अपनी इहलीला समाप्त कर ली।

 

परिजनों का कहना है कि सुन्दर पहले टैक्सी चलाता था। अपनी टैक्सी होने के बावजूद हुए घाटे के चलते उसने अपनी टैक्सी बेच दी। फिर उसने सौ गज में बना अपना मकान भी बेच दिया। उसके बाद कल्लू मनाली में किराये पर ले रखा रेस्टोरेंट भी उसके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा था। गनीमत रही कि उसकी पत्नी शशि आंगनबाड़ी में कार्य करती थी, जिससे उसका घर किसी तरह चल जाता था। फिर भी अपनी आर्थिक बदहाली के चलते उसने इतना कड़ा कदम उठाया। वह पिछले काफी समय से तनाव में था और किसी से भी ज्यादा बातचीत नहीं करता था। अक्सर वह घर पर ही रहता था।

 

लोगों के मुताबिक, सुंदर भरे पूरे परिवार के साथ रहता था, लेकिन अन्य परिजनों को यह तो मालूम था कि उसका कामधंधा ठीक नहीं चल रहा है। लेकिन, इतनी अधिक आर्थिक तंगी होने का अनुमान उसके परिजनों को भी नहीं था। खास बात यह कि सुंदर के पिता भगवान सिंह इस हादसे के दौरान घर पर ही थे, लेकिन मां कमलेश रिश्तेदारी में एक शादी में गई हुई थी। सुंदर का बड़ा भाई मनोज भी रात्रि ड्यूटी पर गया हुआ था, जबकि सबसे छोटा भाई अनुज बाहर रहता है और अविवाहित है। गौरतलब है कि सुंदर का बड़ा पुत्र तुषार मानसिक रूप से कमजोर था और गूंगे-बहरों के स्कूल में पढ़ता था। जबकि लड़की पांचवीं कक्षा में पढ़ती थी। छोटे पुत्र अमन का आज पेपर था। वह अभी मात्र छह साल का है।